गुरुवार, 26 जनवरी 2012

ये क्या हो रहा है.


आचार संहिता के कारण 'माई सैंडिल' के मंचन पर रोक

 शुक्रवार, 27 जनवरी, 2012 को 05:05 IST तक के समाचार
मायावती (फ़ाईल फ़ोटो)
मायावती सरकार विपक्ष के लगाए कई आरोपों का सामना कर रही है
नाटक, कविता, कहानी और कार्टून आदि चाहे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अभिन्न अंग हों लेकिन लखनऊ ज़िला प्रशासन ने एक राजनीतिक व्यंग्य नाटक के मंचन पर मौखिक आदेश से रोक लगा दी है.
'माई सैंडिल' नाम के इस नाटक की पटकथा में 500 साल पहले मायागढ़ की एक राजकुमारी माया और उसके चापलूस मंत्रियों की काल्पनिक कहानी है.
राय उमा नाथ बाली प्रेक्षाग्रह में 28 जनवरी को इसका पहली बार मंचन प्रस्तावित है.
लेकिन यह कहानी मायावती सरकार के पांच साल के कामकाज से मिलती-जुलती हो सकती है, इसलिए लखनऊ ज़िला प्रशासन ने नाटककार मुकेश वर्मा को बुलाकर कहा है कि चुनाव तक इसका मंचन न करें.
जिलाधिकारी अनिल सागर के अनुसार, "इस नाटक के मंचन से आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा."
ग़ौरतलब है कि मायावती सरकार ने हालफ़िलहाल में कई कथित तौर पर भ्रष्ट मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है और बहुजन समाज पार्टी नेतृत्व कई बार भ्रष्टाचार के आरोपों को ख़ारिज कर चुका है.

लिखित में मांगी अनुमति

नाटक करने वाली संस्था सत्यपथ रंगमंडल के लोग ज़िला प्रशासन के इस निर्णय से क्षुब्ध हैं और वे इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश मानते हैं.
"इस नाटक के मंचन से आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा....चुनाव आचार संहिता के अनुसार किसी नेता पर प्रत्यक्ष या परोक्ष टिप्पणी नही हो सकती"
ज़िला मजिस्ट्रेट अनिल सागर
नाटक के लेखक और निदेशक मुकेश वर्मा कहते हैं कि,"नाटक समाज का आइना है. इसे प्रतिबंधित न किया जाए तो अच्छा है."
मुकेश वर्मा ने नाटक के मंचन के लिए लिखित अनुमति मांगी है और वे चाहते हैं कि प्रशासन भी अपना आदेश उन्हें लिखित रूप में दे.
उन्होंने नाटक की पटकथा प्रशासन को उपलब्ध करा दी है.
नाटक की कहानी बहुत दिलचस्प है. इससे यह भी पता चलता है कि पांच साल की माया हुकूमत के बारे में लेखक और कलाकार क्या सोचते हैं.

'हाथी सोने का सैंडिल खा गया'

कल्पना की गई है कि 500 साल पहले मायागढ़ नाम का एक राज्य था. उसकी राजकुमारी माया के पास ऐरावत हाथी था जो सोना चांदी खाता था.
राजकुमारी अपना जन्म दिन शौक से और धूमधाम से मनाती थी. राजकुमारी के मंत्रियों ने राजकुमारी के जन्मदिन पर उपहार देने के लिए सोने की सैंडिल खरीदी. सैंडिल खज़ाने में रखी गई. मगर महावत की गलती से हाथी अपने भोजन के साथ सैंडिल भी खा गया. इससे हड़कंप मच गया क्योंकि वही सैंडिल जन्मदिन पर राजकुमारी माया को उपहार में दी जानी थी.
हाथी के पेट से सैंडिल निकलवाने के लिए वैद्य बुलाया गया. वैद्य ने औषधि दी मगर दरबारियों को एहसास हुआ कि हाथी के पेट से सैंडिल के साथ राजकुमारी की हुकूमत के सारे राज़ भी निकलेंगे जिसकी गंध पूरे राज में फ़ैल जाएगी. इससे समाज में विद्रोह होने का डर था.
इसलिए तय हुआ कि हाथी की लीद को राज्य की सीमाओं पर फेंक दिया जाए. कुछ दरबारियों में इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद था और वह इस प्रस्ताव से सहमत नहीं थे. लेकिन कुछ मंत्री राजकुमारी के ख़िलाफ़ साज़िश में शामिल थे.
"नाटक अंत में लोगों को संदेश देता है कि लोग घरों से निकल कर अच्छे लोगों को वोट करें. नाटक में राजकुमारी का नाम ज़रुर माया है, लेकिन मंचन में कहीं भी माया नामा का संबोधन नही हुआ. नाटक में भ्रष्टाचार संबंधित मुद्दों पर प्रहार है, न कि किसी की व्यक्तिगत आलोचना"
निर्देशक मुकेश वर्मा
इन लोगों की सलाह पर हाथी को दवा खिलाकर सैंडिल पेट से निकाल ली गई और लीद को राज्य की सीमाओं पर फेंक दिया गया.
इससे राजकुमारी का भंडाफोड हो गया और राज्य में विद्रोह हो गया.
लोगों ने राजमहल पर हमला बोल दिया तब राजकुमारी की नींद खुली और उन्होंने मंत्रियों को तलब कर जन विद्रोह का कारण पूछा. मंत्रियों ने सारा किस्सा बताया.
इसके बाद राजकुमारी ने सारे भ्रष्ट मंत्रियों को मार दिया.
निर्देशक मुकेश वर्मा का कहना है, "नाटक अंत में लोगों को संदेश देता है कि लोग घरों से निकल कर अच्छे लोगों को वोट करें. नाटक में राजकुमारी का नाम ज़रुर माया है, लेकिन मंचन में कहीं भी माया नामा का संबोधन नही हुआ. नाटक में भ्रष्टाचार संबंधित मुद्दों पर प्रहार है, न कि किसी की व्यक्तिगत आलोचना."
लेकिन ज़िला मजिस्ट्रेट अनिल सागर ने पत्रकारों को बताया, "चुनाव आचार संहिता के अनुसार किसी नेता पर प्रत्यक्ष या परोक्ष टिप्पणी नही हो सकती."
जिला प्रशासन ने नाटक के निर्देशक को मौखिक रूप से बता दिया है कि चुनाव तक नाटक का प्रदर्शन नही हो सकता.
मगर कागज़ पर अभी निर्णय नही हुआ. ज़िला प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि अभी पुलिस से रिपोर्ट मांगी गयी है और रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लिया जाएगा.

बुधवार, 25 जनवरी 2012

अमर सिंह की सभा में महिला नेता की जमकर पिटाई

अमर सिंह की सभा में महिला नेता की जमकर पिटाई

 
Source: agency   |   Last Updated 09:07(25/01/12)
 
 
 
 
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मुजफ्फरनगर.जिले की खतौली विधानसभा क्षेत्र के तहत गांव कैलावड़ा में राष्ट्रीय लोकमंच के अध्यक्ष अमर सिंह की जनसभा में महिला नेता के साथ जमकर मारपीट की गई। दरअसल, इलाके की महिला नेता मेराज जहां ने राष्ट्रीय लोकमंच के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी उदय प्रताप सिंह व जिलाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह राणा पर पांच लाख रुपये लेकर टिकट बदलने का आरोप लगाया है।

मेराज जहां इसी मुद्दे को लेकर अमर सिंह की सभा में भी समर्थकों के साथ कैलावड़ा गांव में मौजूद आदर्श इंटर कॉलेज के पीछे मैदान में राष्ट्रीय लोकमंच के प्रत्याशी डॉ. प्रमोद आर्य के समर्थन में जनसभा करने आए अमर सिंह का विरोध करने के लिए पहुंच गईं। अमर सिंह के विरोध से बौखलाए प्रत्याशी प्रमोद के समर्थकों व पार्टी के कार्यकर्ताओं ने महिला नेता और उनके समर्थकों को पिटाई की और उन्हें सभा स्थल से खदेड़ दिया। मेराज जहां का कहना है कि उन्हें खेतों में एक किलोमीटर तक दौड़ाकर पीटा गया। मेराज जहां ने एसएसपी से मुलाकात कर चार लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। अमर सिंह से जब इस घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी महिला नेता को पीटा गया है।  

रविवार, 18 दिसंबर 2011

अजित सिंह का सत्ता प्रेम और जाट वोट की कीमत

नागरिक उड्डयन मंत्री बने अजित सिंह

Dec 18, 12:04 pm
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने रविवार को चौथी बार केंद्र में मंत्री पद की शपथ ली। उत्तार प्रदेश में कांग्रेस-रालोद के अच्छे प्रदर्शन के दबाव और बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे नागरिक उड्डयन मंत्रालय की दोहरी चुनौती से अजित सिंह को एक साथ जूझना होगा। राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद अजित सिंह उत्तार प्रदेश की मायावती सरकार पर बरसे और कहा कि अब उत्तार प्रदेश की जनता को कांग्रेस-रालोद गठबंधन के रूप में स्पष्ट विकल्प मिल गया है।
मुख्य तौर पर उत्तार प्रदेश में कांग्रेस की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए हुए संप्रग-दो सरकार के तीसरे मंत्रिमंडल विस्तार के समय राहुल गांधी भी अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी के साथ मौजूद थे। अजित सिंह के मंत्री बनने के बाद उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी समेत वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बधाई दी।
मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या अब 77 हो गई है, जिसमें अजित सिंह 33वें कैबिनेट मंत्री होंगे। पश्चिम उत्तार प्रदेश के इस 72 वर्षीय जाट दिग्गज के कांग्रेस के साथ गठजोड़ के बाद अब संप्रग के सदस्यों की संख्या 272 से बढ़कर 277 हो गई है। चौैधरी अजित सिंह की सबसे बड़ी खासियत रही है कि वह केंद्र और उत्तार प्रदेश के सभी प्रमुख दलों के साथ रह चुके हैं। कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा जैसे दलों के साथ उनका गठबंधन समय-समय पर बनता-बिगड़ता रहा।
मेरठ की बागपत सीट से छह बार सांसद रहे अजित सिंह सबसे पहले वीपी. सिंह की जनता दल सरकार में 1989 से 1990 तक वह उद्योग मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे। दूसरी बार कांग्रेस की पीवी. नरसिंह राव सरकार में फरवरी 1995 से मई 1996 तक खाद्य मंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया था। फिर कांग्रेस से नाता तोड़कर 2001 से 2003 तक भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार में कृषि मंत्री रहे। 2009 का लोकसभा चुनाव भी उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था।
अब उत्तार प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले अजित का कांग्रेस के साथ गठजोड़ पश्चिमी उत्तार प्रदेश में खासा अहम माना जा रहा है। इस गठजोड़ से सबसे ज्यादा खतरा पश्चिमी उत्तार प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा भी, 'उत्तार प्रदेश हमारी प्राथमिकता है।

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

हत्यारे

(हिंदुस्तान हिंदी से साभार )

बसपा सांसद धनंजय सिंह न्यायिक हिरासत में
जौनपुर, एजेंसी
First Published:12-12-11 08:56 PM
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उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पिछले वर्ष हुई दोहरी हत्या के एक मामले में रविवार को लखनऊ में गिरफ्तार जौनपुर लोकसभा सीट से बसपा सांसद धनंजय सिंह को सोमवार को जिले की एक अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है और हिरासत के दौरान संसद के चालू सत्र में शामिल होने की उनकी अपील भी खारिज कर दी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, धनंजय सिंह को आज दोपहर बाद जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अशरफ अंसारी की अदालत में पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिये 23 दिसम्बर की तारीख तय कर दी है।
बसपा सांसद सिंह को जिले के केराकत थाना क्षेत्र में पिछले वर्ष एक अप्रैल को हुई दो व्यक्तियों ठेकेदार संजय निषाद और चाय विक्रेता नंदलाल की हत्या के मामले में कल राजधानी लखनऊ के बहुखंडी विधायक निवास स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और देर रात जौनपुर लाकर पुलिस अभिरक्षा में रखा गया था।
अदालत में पेशी के दौरान बसपा सांसद सिंह ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए लोकसभा के अध्यक्ष की अनुमति के बिना उनकी गिरफ्तारी को अनुचित बताया और संसद के चालू सत्र में भाग लेने की अनुमति दिये जाने की अपील की, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया।

बुधवार, 28 सितंबर 2011

क्यों अमर सिंह को ही जेल जाना पड़ रहा है 'रेवती रमण सिंह के जेल जाने के दिन कब आयेंगे'

अमर ‌को झटका, जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली।
Story Update : Wednesday, September 28, 2011    5:39 PM
नोट के बदले वोट मामले में आरोपी पूर्व सपा नेता अमर सिंह फिर से तिहाड़ जेल की हवा खाएंगे। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने बुधवार को उनकी अंतरिम और नियमित दोनों जमानत याचिकाएं खारिज कर दी। अमर सिंह इस समय एम्स में इलाज करा रहे हैं।

अदालत के इस फैसले के बाद अब पूर्व सपा नेता एम्स में भी न्यायिक हिरासत में रहेंगे। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर अमर सिंह सीधे तिहाड़ जेल जाएंगे। अदालत ने कहा कि जो सबूत मिले हैं उससे पता चलता है कि अमर सिंह ने इस कांड में अहम भूमिका निभाई। विशेष न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल ने अमर सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि कहा कि अमर सिंह अपना इलाज करा रहे हैं। यह एम्स पर निर्भर है कि वह इलाज के लिए कितने दिन तक उनको अस्पताल में रखता है।

इससे पहले कोर्ट ने अमर सिंह की अंतरिम जमानत 28 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी थी। गुर्दा रोग से पीड़ित सिंह ने ईलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति देने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था जिसे उन्होंने बाद में वापस ले लिया। सिंह को नोट के बदले वोट मामले में छह सितंबर को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जेल में तबीयत खराब होने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था।

अमर सिंह को फिर जाना होगा तिहाड़

नई दिल्ली।
Story Update : Thursday, September 29, 2011    3:28 AM
कैश फॉर वोट कांड में गिरफ्तार राज्यसभा सांसद अमर सिंह को फिर तिहाड़ जेल जाना पड़ेगा। अदालत ने अमर सिंह की नियमित और अंतरिम जमानत की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। डॉक्टरों की निगरानी में वे तब तक एम्स में रह सकते हैं, जब तक ठीक नहीं हो जाते। तबीयत सामान्य होने पर उन्हें फिर से तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया गया है।

इसका असर भारतीय समाज पर बहुत गहरा पड़ा
तीस हजारी स्थित विशेष जज संगीता ढींगरा सहगल की अदालत ने एम्स के डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला सुनाया है। अदालत ने यह भी कहा कि दाखिल आरोपपत्र से प्रथम दृष्ट्या लगता है कि आरोपी ने जो किया, उससे संसदीय व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा और भारतीय गणतंत्र का भी मजाक बना। मामले में आरोपी की प्रमुख भूमिका है। अपराध की श्रेणी और गंभीरता को भी नहीं नकारा जा सकता है। यही नहीं संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी इस कृत्य से निराशा हुई है। इसका असर भारतीय समाज पर बहुत गहरा पड़ा है।

छह सितंबर को गिरफ्तार कर तिहाड़ भेजा गया
जमानत की अर्जियां खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि एम्स के डाक्टरों की 26 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक अमर सिंह का स्वास्थ्य स्थिर है। आगे यह एम्स के डॉक्टर ही तय करेंगे कि आरोपी को कब तक अस्पताल में रखे जाने की जरूरत है। तिहाड़ जेल अधीक्षक को आदेश दिया गया है कि डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर अमर सिंह को जेल ले जाया जाए। मालूम हो कि अमर सिंह को छह सितंबर को गिरफ्तार कर तिहाड़ भेजा गया था।

सोमवार, 29 अगस्त 2011

'जश्न की लूट'

मोहन लाल शर्मा

देर शाम का वक्त था, घड़ी की सुईयां पौने नौ बजा रहीं थी और जगह थी - दिल्ली का इंडिया गेट. मौका था अन्ना हज़ारे के अनशन ख़त्म होने का...
अन्ना टीम के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने समर्थकों को शाम छह बजे इंडिया गेट पर जुटने का आह्वान किया था. इसके बाद दसियों हज़ार लोग वहाँ पहुँच गए.
यूँ तो हर रविवार को ही इंडिया गेट पर दिल्ली की जनता चाट-पकौड़े, गोलगप्पे और भेल-पूड़ी खाने के लिए जुटती है, पर इस रविवार की बात कुछ अलग ही थी.
हाथों में तिरंगा लहराते लोग अन्ना और जनलोकपाल विधेयक के पक्ष में नारे लगा रहे थे. कुछ मिठाइयाँ बाँट रहे थे, तो कई ढ़ोल नगाड़ों की थाप पर जमकर नाच रहे थे.
हाथों में मोमबत्ती लिए लोगों की टोलियां आ रहीं थी.
बच्चे, बूढ़े और जवान दस-दस रूपए में दोनों गालों पर पेंट से तिरंगा झंड़ा बनवा रहे थे.
पानी बेचने वाले की स्टॉल पर अचानक कुछ लोगों ने धावा बोल दिया. बीस पच्चीस की तादाद में लोग उसकी दुकान से पानी की बोतलें लूट के भागने लगे. पहले एक आदमी ने बोतल निकाली, फिर दूसरे ने, फिर तीसरे ने... इसके बाद तो ये सिलसिला उस समय तक चलता रहा जब तक उसकी पूरी दुकान ही लुट नही गई. पांच मिनट के भीतर ही बोतलों की सारी पेटियाँ गायब हो चुकी थी.
दस रूपए में "मैं अन्ना हूँ" की टोपी धड़ल्ले से बिक रही थी. हर तरफ़ उत्सव जैसा ही माहौल था.
इसी माहौल में जोश से लबरेज़ परिवार दूधिया रोशनी में नहाए इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति के सामने खड़े होकर तस्वीरें खिंचा रहे थे.
दूर के दृश्यों की तस्वीरें कैद करने के लिए टीवी चैनलों के कैमरे क्रेन पर तैनात थे और इन्हीं के ज़रिए सारे टीवी चैनल जश्न के इस मज़र का सीधा प्रसारण कर रहे थे.

लुट गई दुकान 

पुलिस का घेरा काफ़ी मज़बूत था. चप्पे- चप्पे पर पुलिस भी मौजूद थी. लेकिन पुलिस लोगों के इस जश्न में कोई बाधा नही पहुँचाना चाहती थी.
सब कुछ शांतिपूर्ण था. साढ़ै नौ बज़े के आसपास मैने देखा कि एक पानी बेचने वाले के स्टॉल पर अचानक कुछ लोगों ने धावा बोल दिया. बीस पच्चीस की तादाद में लोग दुकान से पानी की बोतलें लूट के भागने लगे.
पहले एक आदमी ने बोतल निकाली, फिर दूसरे ने, फिर तीसरे ने... इसके बाद तो ये सिलसिला उस समय तक चलता रहा जब तक उसकी पूरी दुकान ही लुट नही गई.
पांच मिनट के भीतर ही बोतलों की सारी पेटियाँ गायब हो चुकी थी.
उस दुकानदार ने शुरुआत में रोकने की कोशिश की, पर चाह कर भी वो कुछ नहीं कर सकता था क्योंकि उसके पास इसे देखते रहने के अलावा कोई और विकल्प भी नही था.
पानी की बोतल लूट के भाग रहे एक लड़के को मैने रोका और उससे पूछा कि दुकान क्यों लूट रहे हो, उसने जवाब दिया कि सब तो यही कर रहे हैं ना, तो मैंने क्या ग़लत किया.
इस घटना पर न तो किसी टीवी चैनल के संवाददाता की नज़र गई और न ही किसी पुलिस वाले की.
ये सब देखने के बाद मैंने इंडिया गेट के एक कोने में अंधेरे में बैठी भुट्टे सेक रही एक अधेड़ उम्र की महिला की ओर रुख़ किया.
उससे मैंने पूछा कि सब लोग तुम्हारे भुट्टे के पैसे देते हैं?
तो उसने कहा, "नहीं साहब आज तो तमाम लोग ऐसे ही थे, जिन्होंने भुट्टे खाए और बिना पैसे दिए ही चले गए."
भले ही इन्हें लोग छोटी घटनाएं कहेंगे ,पर मेरे दिमाग में इन घटनाओं से कुछ सवाल पैदा हुए...कि जश्न किसका औऱ किसके लिए...क्या ये ही आज़ादी की दूसरी लड़ाई है... क्या इसी के लिए अन्ना अनशन पर बैठे थे ?
    (साभार बीबीसी से साभार)

शनिवार, 13 अगस्त 2011

आग लगाकर दे दी जान


तंगी झेल रहा था, आग लगाकर दे दी जान

Aug 14, 02:21 am
अलीगढ़ : आर्थिक तंगी से परेशान चल रहे अधेड़ ने खुद पर मिंट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली। शनिवार सुबह घायल ने मेडिकल कालेज में दम तोड़ दिया।
देहली गेट क्षेत्र के महफूज नगर निवासी सलीम (50) पुत्र इदे खां ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर शुक्रवार को दिन में तकरीबन तीन बजे खुद को आग लगाई थी। गंभीर हालत में परिजनों ने उसे मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था।